जीवन यात्रा
जो लगते हैं, हैं नहीं, पहने रूप अनूप
केवल एक परिधान है मानव का स्वरूप
जीवन पानी रूप है बरतन सम आकार
बाहर एक शरीर है भीतर एक संसार
जाने कितने जीन्स के अनुभव और विचार
युगों युगों की यात्रा में सञ्चित व्यवहार
एक अकेली कोशिका उपजे जीवन वृन्द
धरती पर एक चेतना लिखती थी ज्यों छन्द
भागित क्रोमोज़ोम्स थे बीते अरबों वर्ष
तेइस तेइस अंक का मानव है निष्कर्ष
जन्म- मृत्यु के बीच जो छोटा सा अवकाश
सम्बन्धों और प्रेम से उसमें है प्रकाश
अनबूझे आरम्भ से पहले गहरी रात
जीवन जैसे यात्रा और अन्त अज्ञात
Writte By: Shameem Zahra




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