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Ashfaq Ahmad
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Showing posts with label Ashok's Poetry. Show all posts
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भटकाव

October 07, 2026
  एक सिसकता हुआ मौन है एक दिशाहीन दौड़ और एक भ्रम है जो वास्तविक सा लगता है। जीवन-मरण के प्रश्नों में उलझा हुआ मैं मोक्ष की तलाश में भटक गया ...Read More

भ्रम

June 12, 2023
  भ्रम शायद किसी लम्बे सुनसान रास्ते का भ्रम है यह या फिर एक गहरी नींद का या शायद स्वप्नों की स्मृतियों का। एक ठोकर के बाद दुख रहा है पैर का...Read More

आखिरी वक़्त

February 27, 2023
  आखिरी वक़्त  आखिरी वक्त आखिरी क्या था एक आखिरी सवाल एक आखिरी आह! और आखिर में अलग होते रास्ते। अतीत के दुःखों का दर्द आखिरी हौसले के साथ एक...Read More

मैं जितना देह में था

November 08, 2022
मैं जितना देह में था उतना ही देह से बाहर रहा जुलूसों में कुचला नारों में उछला झंडों में फड़फड़ाया और अंत में बीड़ी के धुयें में धुंआ होकर छाती ...Read More

लम्बी रात

October 21, 2022
  लम्बी रात यह रात इतनी लम्बी है कि प्रहरों में नहीं, कल्पों में ढल रही हैं ऐसा लगता है कि पृथ्वी भूल गयी है अपनी धुरी पर घूमना. मेरी आंखों ...Read More

एक उदास सुबह

October 16, 2022
  __एक उदास सुबह __ कितनी उदास है यह सुबह पेड़, पंछी, पवन और पावस के बावजूद भी कितना खालीपन है यहाँ. गरजते मेघों, गिरती बूंदों और खनकते पत्तो...Read More

पेड़

September 24, 2022
  पेड़ यहां मेरे घर के सामने बहुत से पेड़ हैं मैं उन्हें बस पत्तों से पहचानता हूँ उनकी गंध से पहचानता हूँ उनसे टपके द्रव के धब्बों को पहचानता ...Read More