शिकायत June 29, 2014 हम ही करते गये उन्हें हमसे प्यार कब था हमारी मुहब्बत पे उन्हें भला ऐतबार कब था दश्तो सेहरा में जाने का सबब मत पूछ...Read More
इंतज़ार June 29, 2014 ये मुमकिन नहीं मेरी आँख में कोई मंज़र ही न हो और सीने में छुपा एक गम का समंदर ही न हो रूए ज़मी ...Read More
दस्तूर-ए-इश्क़ June 29, 2014 दस्तूरे इश्क़ किसी रोज़ बदल जाये तो क्या बात हो परवाना अपनी ही आग में जल जाये तो क्या बात हो जिनके इंतज़ार में ...Read More
तारीफ June 29, 2014 चांदनी में धुली ज़मी देखी , बेकरा आसमान देखा है हमने चाँद की ओट में छुपके सारा जहान देखा है खुशियो को पाया...Read More