इंक़लाब June 29, 2014 हम जगायेंगे तो अलख इंक़लाब की जगेगी यारों हमारे ही लहू से एक नई फसल उगेगी यारों जिसे भी सौंपी डोर हमन...Read More
खैर-मक़्दम June 29, 2014 वो आये हैं जब चमन में , तब जाके बहार आई है हर पत्ता , हर फूल , हर कली मुस्कराई है यूँ निगाहे...Read More
ईमान March 22, 2014 ढूँढता हूँ मगर कहीं ईमान नहीं मिलता कहाँ खो गया शराफत का सामान नहीं मिलता सोचा के किसी ईमान वाले से ...Read More