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भ्रम

June 12, 2023
  भ्रम शायद किसी लम्बे सुनसान रास्ते का भ्रम है यह या फिर एक गहरी नींद का या शायद स्वप्नों की स्मृतियों का। एक ठोकर के बाद दुख रहा है पैर का...Read More

आखिरी वक़्त

February 27, 2023
  आखिरी वक़्त  आखिरी वक्त आखिरी क्या था एक आखिरी सवाल एक आखिरी आह! और आखिर में अलग होते रास्ते। अतीत के दुःखों का दर्द आखिरी हौसले के साथ एक...Read More

मैं जितना देह में था

November 08, 2022
मैं जितना देह में था उतना ही देह से बाहर रहा जुलूसों में कुचला नारों में उछला झंडों में फड़फड़ाया और अंत में बीड़ी के धुयें में धुंआ होकर छाती ...Read More

लम्बी रात

October 21, 2022
  लम्बी रात यह रात इतनी लम्बी है कि प्रहरों में नहीं, कल्पों में ढल रही हैं ऐसा लगता है कि पृथ्वी भूल गयी है अपनी धुरी पर घूमना. मेरी आंखों ...Read More

एक उदास सुबह

October 16, 2022
  __एक उदास सुबह __ कितनी उदास है यह सुबह पेड़, पंछी, पवन और पावस के बावजूद भी कितना खालीपन है यहाँ. गरजते मेघों, गिरती बूंदों और खनकते पत्तो...Read More

कविता

October 20, 2020
नहीं लिख सकता मैं हर बात पर कविता कुछ बातों पर मुझे झुंझलाना आता है कुछ पर गुस्सा कुछ पर मैं रो पड़ता हूँ और कुछ पर चुप ही रह जाना आता है कु...Read More